ओवेरियन सिस्ट के कारण, लक्षण और इलाज जाने डॉ राठी से

Dr. Narendra Rathi

ओवरी (Ovary) को हिंदी में अंडाशय कहा जाता है। यह गर्भाशय के दोनों तरफ निचली ओर स्थित होता है। यह महिलाओं में प्रजनन का एक प्रमुख हिस्सा है। महिलाओं के शरीर में दो अंडाशय पाए जाते हैं जिनका कार्य दो प्रमुख तरह के हार्मोन बनाना है। ये अंडे एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रेजोस्टेरोन (Progesterone) हार्मोन तैयार करते हैं जो गर्भावस्था के लिए बहुत जरूरी होता है। 

अंडाशयों में बनने वाले सिस्ट को ओवेरियन सिस्ट कहा जाता है। ओवेरियन सिस्ट को अंडाशय सिस्ट या ओवरी में गाँठ के नाम से भी जाना जाता है। ओवेरियन सिस्ट एक थैली में भरे हुए तरल पदार्थ यानी की एक गाँठ की तरह होते हैं। महिलाओं में दो अंडाशय होते हैं, ये दोनों गर्भाशय के दोनों तरफ स्थित होते हैं। यही कारण है की अंडाशय में सिस्ट बनने की वजह से अंडे बाहर नहीं आ पाते हैं। अंडों के बाहर नहीं आने के कारण महिलाओं में बांझपन की समस्या पैदा होती है। 

ओवेरियन सिस्ट की समस्या होने पर आपको तुरंत किसी अच्छे गायनेकोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए। समय पर इस बीमारी का उचित इलाज न कराने या इसे नजरअंदाज करने पर दूसरी और ढेरों गंभीर बीमारियां पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है। इस लेख के जरिए हम आपको ओवेरियन सिस्ट से जुड़ी हर संभव जानकारी से अवगत कराएंगे।

एक नजर

  • ओवेरियन सिस्ट का इलाज दो तरीकों से किया जाता है|
  • जब उपचार से सिस्ट नष्ट नहीं होते हैं तब डॉक्टर सर्जरी करते हैं|

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण

ज्यादातर मामलों में ओवेरियन सिस्ट के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और थोड़े समय के बाद यह अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन जब अंडाशय में सिस्ट की लम्बाई 5 सेंटीमीटर से ज्यादा होती है तब कई लक्षण सामने आते हैं।

  • भूख ना लगना – Low Appetite During Ovarian Cyst in Hindi 

भूख ना लगना या फिर थोड़ा सा खाने के बाद ही पेट भरा-भरा लगना सिस्ट का एक लक्षण है। इस दौरान पेट में जलन की समस्या भी होती है। 

  • संभोग करते वक्त असहनीय पीड़ा – Unbearable Pain While Sexual Intercourse During Ovarian Cyst in Hindi

ओवेरियन सिस्ट की समस्या होने पर अगर आप संभोग करते हैं तो आपको भारी दर्द का सामना करना पड़ता है। दरअसल, यह सेक्स के दौरान ओवरी में पड़ रहे दबाव के कारण होता है। 

  • असामान्य पीरियड्स – Irregular Periods During Ovarian Cyst in Hindi

पीरियड्स का समय पर ना होना या फिर पीरियड्स में अधिक रक्तस्राव होना ओवेरियन सिस्ट के कारण हो सकते हैं।

  • पेट में सूजन और दर्द — Inflammation and Pain in Abdomen During Ovarian Cyst in Hindi

पेट के निचले हिस्से में सूजन और दर्द की समस्या ओवेरियन सिस्ट के कारण हो सकती है। ओवेरियन सिस्ट होने पर गर्भाशय के आसपास दर्द की स्थिति बनी रहती है। 

  • पेशाब करते वक्त दर्द — Pain While Urinating During Ovarian Cyst in Hindi

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण में पेशाब करते वक्त दर्द या फिर यूरिनेशन (Urination) की समस्या भी शामिल है। यह ब्लैडर (Bladder) में दबाव उत्पन्न करता है जिससे पेशाब करते वक्त पीड़ा उत्पन्न होती है।

ओवेरियन सिस्ट के कारण और प्रकार — Types and Causes of Ovarian Cyst in Hindi

  • फॉलिकल सिस्ट — Follicle Cyst in Hindi

पीरियड्स के दौरान महिलाओं के ओवरी में अंडो का निर्माण होता है जिसे फॉलिकल (Follicle) कहते हैं। यह एक थैली की तरह अंडाशय के अंदर मौजूद होते हैं जो समय आने पर फट जाते हैं। लेकिन कभी कभी यह थैली नहीं फटती और इसके अंदर मौजूद लिक्विड मटेरियल जमा होकर सिस्ट का निर्माण करते हैं।

  • कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट — Corpus Luteum Cyst in Hindi

अंडों के निकलने के बाद फॉलिकल स्वयं नष्ट हो जाते हैं। अगर यह खत्म नहीं होते तो इनके अंदर मौजूद पदार्थ लगातार बढ़ते हुए एक जगह इकट्ठा होते हैं। इन्हीं पदार्थों का अतिरिक्त मात्रा में इकट्ठा हो जाना कार्पस ल्यूटियम सिस्ट (Corpus Luteum Cyst) कहलाता है। यह सिस्ट हर महीने ओवुलेशन (Ovulation) के बाद उत्पन्न होता है और एक-दो हफ्ते में नष्ट हो जाता है। कई बार यह सिस्ट 2 से 3 महीने तक भी बना रहता है जिसके कारण अंदर ही अंदर रक्तस्राव होने लगता है। 

अन्य प्रकार के ओवेरियन सिस्ट — Other Types of Ovarian Cyst in Hindi

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  • कॉम्प्लेक्स सिस्ट – Complex Cyst in Hindi

कॉम्प्लेक्स सिस्ट सामान्य नहीं है और इनका आपके मेंस्ट्रुअल साइकिल से कोई संबंध नहीं है। कॉम्प्लेक्स सिस्ट तीन प्रकार के होते हैं जिन्हे हम डर्मोइड सिस्ट, सिस्टाडेनोमास सिस्ट और एंडोमेट्रियोमा सिस्ट के नाम से जानते हैं। 

  • सिंपल सिस्ट – Simple Cyst in Hindi 

सिंपल सिस्ट बहुत ही सामान्य समस्या हैं। जब आपका अंडाशय अंडे को रिलीज नहीं कर पाता है या फिर अंडे को रिलीज करने के बाद जब आपके अंडाशय में एक कूप का विकास होता है तब सिंपल सिस्ट भी विकसित होते हैं। यह आपकी नार्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल के कारण होते हैं इसलिए इन्हे फंक्शनल सिस्ट भी कहा जाता है। आमतौर पर फंक्शनल सिस्ट के लक्षण नहीं होते हैं।

  • सिस्टाडेनोमास सिस्ट – Cystadenomas Cyst in Hindi

ये सिस्ट अंडाशय के अंदर नहीं बल्कि बाहरी सतह पर मौजूद होते हैं। इस तरह के सिस्ट से कैंसर होने का खतरा नहीं होता है। 

  • एंडोमेट्रियोमा सिस्ट – Endometrioma Cyst in Hindi

गर्भाशय के अंदर बनने वाले टिश्यू का लिंक कभी कभी गर्भाशय के बाहर भी हो जाता है। यह टिश्यू ओवरी से जुड़े होते हैं जिसके कारण सिस्ट बनते हैं|

  • डर्मोइड सिस्ट – Dermoid Cyst in Hindi

ओवेरियन सिस्ट का यह एक ऐसा प्रकार है जिसमें थैली के भीतर बाल, वसा और अन्य टिश्यू मौजूद हो सकते हैं| जब ओवरी में अधिक मात्रा में छोटे छोटे सिस्ट बनने लगते हैं तब ओवरी का आकार बड़ा होने लगता है। इसे ही पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic ovary syndrome) कहते हैं। यह बहुत खतरनाक समस्या है तथा इसका सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह बांझपन का कारण बन सकती है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम होने पर असामान्य तरीके से वजन बढ़ने लगता है। 

  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम – Polycystic Ovary Syndrome

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम बहुत खतरनाक समस्या है तथा इसका सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह बांझपन का कारण बन सकती है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम होने पर असामान्य तरीके से वजन बढ़ने लगता है। 

  • चॉकलेट सिस्ट – Chocolate Cyst in Hindi 

एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित होने की स्थिति में हर मासिक चक्र के दौरान ओवरी में खून जमा हो जाता है। जो आगे जाकर चॉकलेट सिस्ट का कारण बनता है। चॉकलेट सिस्ट होने पर मासिक धर्म के समय काफी दर्द होता है तथा गर्भाधारण में भी शिकायत आती है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी इसका सबसे बढ़िया इलाज है।   

ओवेरियन सिस्ट कैंसर तो नहीं — Is Not Ovarian Cyst Cancer in Hindi

महिलाओं में ओवेरियन कैंसर की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। ओवेरियन सिस्ट कैंसर नहीं है लेकिन यह कैंसर की वजह अवश्य बन सकता है। जब गर्भाशय में मौजूद ट्यूब नष्ट और अंडाशय में अतिरिक्त मात्रा में छोटे छोटे सिस्ट उत्पन्न होने लगते हैं तब ओवेरियन कैंसर की समस्या होती है। ओवेरियन सिस्ट और ओवेरियन कैंसर के बीच में अंतर का पता लगा पाना मुश्किल होता है क्योंकि यह एक ही जगह बनते रहते हैं। ओवेरियन कैंसर का पता तब चलता है जब यह पूरे पेल्विक फ्लोर (Pelvic Floor) को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। अगर सही समय पर इसका पता लग जाए तो इलाज संभव है।

मेनोपॉज के बाद अंडाशय की कार्य क्षमता पर भारी प्रभाव पड़ता है जिससे ओवेरियन कैंसर होने का खतरा रहता है। जो महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) की समस्या से पीड़ित है, उन्हें भी ओवेरियन कैंसर हो सकता है। ओवेरियन कैंसर का खतरा तब और ज्यादा बढ़ जाती है जब आप 30 वर्ष की उम्र में पहली बार मां बनती है। ओवेरियन कैंसर प्रेगनेंसी के दौरान भी हो सकता है। अगर समय समय पर पेल्विक जांच कराई जाए तो ओवेरियन कैंसर की समस्या से बचा जा सकता है।

ओवेरियन सिस्ट और ओवेरियन कैंसर के बहुत से लक्षण सामान्य होते हैं इसलिए महिलाएं इसे नजरंदाज कर देती हैं। लक्षणों के आधार पर ओवेरियन कैंसर का अनुमान लगाना गलत होगा, क्योंकि जांच के बाद ही इसका सटीक पता लगाया जा सकता है। परीक्षण के बाद अगर कैंसर होने की आशंका दिखाई देती है तो कीमोथेरेपी (Chemotherapy), रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) या फिर सर्जरी के माध्यम से इलाज किया जाता है। 

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