क्या है पीसीओएस? पूर्ण जानकारी

Dr. Narendra rathi

पीसीओएस (PCOS) महिलाओं को होने वाली समस्या है, लेकिन इसके बावजूद इससे ज्यादातर महिलाएं अनजान रहती हैं। उनके लिए बिल्कुल नया शब्द है और इसी कारण जब किसी महिला को यह समस्या होती है, तो उस समय यह समझ नहीं पाती है कि उन्हें यह क्या हुआ है और वे इससे कैसे छुटकारा पाएं। इंडिया टाइम्स की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर 4 महिलाओं में से 1 महिला पीसीओएस से पीड़ित है। ये आकंड़े इस समस्या की गंभीरता को बखूबी तरीके से बयां करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि महिलाओं को इसकी आवश्यक जानकारी दी जाए ताकि वे इसके प्रति सर्तक रह सके और यदि उन्हें कभी पीसीओएस हो तो उस स्थिति में वह इसका इलाज सही तरीके से करा सके।

यदि आपको भी महिला के स्वास्थ संबंधी इस बीमारी की आवश्यक जानकारी नहीं है तो फिर आपको इस लेख को जरूर पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें हमने पीसीओएस की पूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है।

क्या है पीसीओएस? (What is PCOS? – in Hindi)

पीसीओएस का पूरा नाम पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम है, जो महिला के असंतुलित हॉर्मोन की वजह से होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से मासिक धर्म के अनियमित होने पर भी हो सकती है, जिसकी वजह से महिला को गर्भधारण करने में मुश्किल होती है। हालांकि,पीसीओएस का इलाज संभव है, लेकिन यदि काफी समय तक इसका इलाज न किया जाए तो गंभीर रूप ले सकती है और यह महिला बांझपन (Female Infertility) का कारण भी बन सकता है।

पीसीओएस के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of PCOS in Hindi)

किसी भी अन्य समस्या की तरह पीसीओएस के भी अपने कुछ लक्षण होते हैं, जो इसकी शुरूआत के संकेत देते हैं।

अत: यदि किसी महिला को ये 5 लक्षण नज़र आए तो उसे बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अपने स्वास्थ की अच्छी तरह से जांच करानी चाहिए-

  1. मासिक धर्म का सही समय पर न होना- यह पीसीओएस का प्रमुख लक्षण है जिसमें महिला के मासिक धर्म सही समय पर नहीं हो पाते हैं।आमतौर पर, इसे गर्भावस्था का संकेत समझा जाता है,लेकिन अक्सर यह पीसीओएस जैसी गंभीर बीमारी की शुरूआत का कारण भी हो सकता है।
  2. अधिक मात्रा में रक्तस्राव होना- यदि किसी महिला को अधिक मात्रा में रक्तस्राव होता है, तो उसे इसकी जांच अपने डॉक्टर से करानी चाहिए क्योंकि यह पीसीओएस का लक्षण हो सकता है।
  3. शरीर के अंगोंं जैसे मुंह, पेट, कमर इत्यादि पर बालों का उगना- आपके कुछ ऐसी महिलाओं  को देखा होगा, जिनके चेहरे, हाथों इत्यादि पर पुरूषों की तरह बाल होते हैं।ऐसा मुख्य रूप से हॉर्मोन अंसुतलन की वजह से होता है, जिसके कई सारे अन्य परिणाम भी हो सकते हैं। इनमें पीसीओएस की समस्या भी शामिल है।
  4. मुंहासों का होना- हर महिलाओं को मुंहासों की समस्या से गुजरना पड़ता है। कुछ महिलाएं इसे आम समस्या समझती हैं और इसी कारण वे इसका इलाज सही तरीके से नहीं कराती हैं।लेकिन, हर बार ऐसा करना नुकसानदायक भी साबित हो सकता है क्योंकि यह पीसीओएस जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
  5. वजन का बढ़ना- यदि किसी महिलाा का वजन काफी अधिक होता है, तो उसे कम करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पीसीओएस की समस्या क्यों होती है? (Causes of PCOS in Hindi)

पीसीओएस की समस्या किसी भी महिला को हो सकती है और ऐसा मुख्य रूप से कुछ विशिष्ट कारणों से होता है।

पीसीओएस से निम्नलिखित कारण हो सकते हैं-

  • आनुंविशिकी कारण का होना- ऐसी कई सारी बीमारियां होती हैं, जो आनुंविशिक या जेनेटिक होती हैं।अत: यदि  किसी महिला के परिवार में किसी अन्य सदस्य को पीसीओएस की समस्या है, तो उसे अपने स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि उसे यह बीमारी होने की संभावना काफी अधिक रहती है।
  • डायबिटीज का मरीज होना- पीसीओएस की समस्या ऐसी महिला में भी देखने को मिलती है, जो डायबिटीज से पीड़ित होती है।अत: diabetes से पीड़ित महिला को अपने स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • वजन का अधिक होना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि पीसीओएस की समस्या वजन के अधिक होने पर भी होती है।
  • शरीर में सूजन का होना- यदि किसी महिला के शरीर में अचानक से सूजन हो जाती है, तो उसे इसे नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से पीसीओएस भी हो सकती है।
  • एंड्रोजन का अधिक मात्रा में उत्पन्न होना- अक्सर, ऐसा भी देखा गया है कि पीसीओएस की समस्या उस स्थिति में भी होती है, जब किसी महिला के शरीर में एंड्रोजन अधिक मात्रा में उत्पन्न होता है।

पीसीओएस का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Treatments of PCOS in Hindi)

यह सवाल उस महिला के मन में आता है, जो पीसीओएस की समस्या से पीड़ित होती है। चूंकि, उसे इसकी वजह से काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसी कारण वह हर हमेशा ऐसे माध्यमों की तलाश में रहती है, जिसकी वजह से उसे इससे निजात मिल सके। हो सकता है कि कुछ महिला को यह एक लाइलाज बीमारी लगे और इसी कारण वे इसका सही इलाज न करा पाई हो, लेकिन यदि उन्हें यह पता हो कि किसी भी अन्य बीमारी की तरह पीसीओएस का भी इलाज संभव है, जिसे इन तरीकों से किया जा सकता है, तो शायद वे भी बेहतर ज़िदगी जी पातीं-

आपकी जानकारी के लिए पीसीओएस का इलाज करने के लिए कुछ जड़ी-बूटियों के बारे में जानकारी अधोलिखित है:

शतावरी (अस्परागस रेसमोसस)

शतावरी विटामिन ए, बी 1, बी 2, सी, ई, फोलिक एसिड और मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और आयरन जैसे खनिजों का एक समृद्ध स्रोत है। ये खूबियां इस जड़ी बूटी को एक आदर्श एंटीऑक्सीडेंट बनाती है जो महिलाओं में प्रजनन प्रणाली की रक्षा करती है। यह मधुमेह विरोधी गुणों के कारण इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में भी मदद करती है। इसका एक और लाभ यह है कि यह प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में भी सहायक है।

शिलाजीत (प्यूरिफाइड अस्फाल्टम)

शिलाजीत अपने एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। यह इम्युनिटी बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है, जो महिलाओं की प्रजनन प्रणाली को फिर से जीवंत करता है पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को भारी रक्तस्राव होता है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। इस जड़ी बूटी के सेवन से आयरन की कमी नहीं होती तथा यह शरीर में उसकी मात्रा को बढ़ाने के लिए जानी जाती है।

3. हल्दी (करकुमा लोंगा)

हल्दी को इसके उपयोग की विविधता के लिए जाना जाता है। इसे खाना पकाने, सौंदर्य उत्पादों और यहाँ तक ​​कि औषधीय प्रयोजनों के लिए भी किया जाता है। इसके औषधीय गुण महिलाओं को बहुत राहत प्रदान करते हैं। हल्दी इंसुलिन प्रतिरोध क्षमता को बेहतर बनाने, महिला प्रजनन प्रणाली को डिटॉक्सीफाई करने, मुँहासे हटाने आदि में सहायता करती है।

4. विभीतकी (टर्मिनलिया बेलेरिका)

पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए इस औषधीय पौधे के कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ हैं, तथा शरीर मैं मौजूद शर्करा के चयापचय में सुधार एक ऐसा ही लाभ है। विभीतकी, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुणों से परिपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, यह पाचन संबंधी जटिलताओं को ठीक करने के लिए भी जाना जाता है।

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पीसीओएस के जोखिम क्या हो सकते हैं? (Risks of PCOS in Hindi)

यदि कोई महिला पीसीओएस का इलाज सही समय पर नहीं कराती है, तो उसके लिए स्थिति बदतर हो सकती है और उसे कई सारे जोखिमों का सामना करना पड़  सकता है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

  • बांझपन का होना- यदि पीसीओएस लंबे समय तक लाइलाज रह जाती है, तो यह बांझपन  का कारण बन सकता है।बांझपन को इनफर्टिलिटी के नाम से भी जाना जाता है, जिसकी वजह महिला मां नहीं बन पाती है।
  • गर्भपात होना-  बांझपन के अलावा यदि किसी महिला  को गर्भावस्था के दौरान पीसीओएस की समस्या हो जाती है, तो इसकी वजह से उसका गर्भपात (मिसकैरिज) भी हो सकता है।
  • लीवर में सूजन का होना- पीसीएओएस का असर महिला के  शरीर के अन्य अंगों की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है।इसकी वजह से उसके लीवर में सूजन भी पड़ सकती है हालांकि, इसका इलाज कुछ दवाईयों के द्वारा संभव है।
  • नींद न आना- पीसीओएस के लाइलाज रहने पर यह भी देखा गया है कि इससे पीड़ित महिला को नींद न आने की समस्या हो जाती है।
  • अवसाद का होना- पीसीओएस का असर महिला की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक क्षमता पर भी पड़ता है और वह अवसाद का शिकार भी बन जाती है।हालांकि, इस स्थिति को मनोवैज्ञानिक की सहायता से ठीक किया जा सकता है।

पीसीओएस की रोकथाम कैसे की जा सकती है? (Precautions of PCOS in Hindi)

हालांकि, पीसीओएस की समस्या अधिकांश महिलाओं में देखने को मिलती है और इसकी वजह उन्हें काफी तकलीफों से भी गुजरना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद राहत की बात यह है कि यदि कोई महिला कुछ सावधानियों को बरते तो वह इसकी रोकथाम कर सकती है।

यदि कोई महिला इन 5 सावधानियों को बरते तो वह पीसीओएस की रोकथाम कर सकती है-

  1. पौष्टिक भोजन करना- ऐसा माना जाता है कि हमारे खानपान का असर हमारे स्वास्थ पर पड़ता है।यह बात पीसीओएस पर भी लागू होती है क्योंकि ऐसे बहुत सारे मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें पीसीओएस होने का प्रमुख कारण खराब खानपान होता है।
  2. व्यायाम करना- यदि कोई व्यक्ति (महिला और पुरूष दोनों) नियमित रूप से व्यायाम करता है तो उसे किसी भी तरह की बीमारी होने की संभावना काफी कम होती है।अत: यदि कोई महिला पीसीओएस की रोकथाम करना चाहती है तो उसे नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।
  3. बीएमआई को नियंत्रित रखना- पीसीओएस की समस्या उस महिला को भी हो सकती है, जिसका बीएमआई कम होता है।इसी कारण सभी महिलाओं को अपने बीएमआई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि उसे कोई गंभीर बीमारी न हो।
  4. डायबिटीज का इलाज कराना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि पीसीओएस की समस्या डायबिटीज के कारण भी होती है।अत: डायबिटीज से पीड़ित महिला को अपने स्वास्थ का विशेष ध्यान रखना चाहिए और किसी भी तरह की समस्या होने पर इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए।
  5. हेल्थ चेकअप कराना- यह सबसे महत्वपूर्ण चीज है, जिसका ख्याल सभी महिलाओं को रखना चाहिए।उन्हें नियमित रूप से अपना हेल्थ चेकअप कराना चाहिए ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं और इसके अलावा यदि उन्हें शरीर में किसी बीमारी के लक्षण नज़र आते हैं तो वह समय रहते इसका इलाज करा सकें।

जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि वर्तमान समय में महिला स्वास्थ संबंधी कई सारी समस्याएं फैल रही हैं।

इनमें पीसीओएस (PCOS) भी शामिल है, जो तनावपूर्ण दौर का परिणाम है। अधिकांश महिलाएं इसकी ओर ध्यान नहीं देती हैं क्योंकि वे खुद से ज्यादा अपने प्रियजनों का ध्यान रखती हैं और इसी कारण वे इसका इलाज सही समय पर शुरू नहीं करा पाती है, लेकिन जब कुछ समय के बाद यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है तो उस स्थिति में उनके लिए उपचार विकल्प सीमित हो जाते हैं। चूंकि,ज्यादातर महिलाओं को इस बीमारी की पूर्ण जानकारी नहीं होती है, इसी कारण वे इसका शिकार आसानी से हो जाती हैं। अत:यह जरूरी है उनमें इस समस्या के प्रति जागरूकता को बढ़ाया जाए।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित  हुआ होगा क्योंकि इसमें हमने पीसीओएस की आवश्यक जानकारी देने की कोशिश की है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में किसी महिला को स्वास्थ संबंधी किसी समस्या और उसके इलाज  के संभावित तरीकों की अधिक जानकारी चाहिए, तो वह उसके लिए +91-9868282982 पर Call करके इसकी मुफ्त सलाह ले सकती है।

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