एंटी-मुलेरियन हार्मोनल टेस्ट क्यों किया जाता है? -Why we AMH test is important?

आइए जानते हैं कि किसी महिला की प्रजनन क्षमता को मापने के लिए यह AMH टेस्ट की क्या जर्रूरत होती है सामान्य और स्वस्थ महिला में AMH Level- 1.0 नैनोग्राम मिली होता है, 1.0 नैनोग्राम मिली से कम मात्रा होने पर आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए जल्द उपचार कराने पर इसकी मात्रा भड़कर सफलतापूर्वक गर्भधारण में आवश्यक है।

AMH Anti mullerin hormone यह एक ऐसा हॉर्मोन होता है जो ovary से हेल्दी egg produce करने का काम करता है। शरीर में AMH का level जितना अच्छा होगा उतना ही ज्यादा हल्दी ovary से निकलते हैं । जिससे प्रेग्नेंट होने का बहुत अधिक चांस होता है ।अगर AMH का लेवल कम होता है तो ऐसे में egg रिलीज नहीं होने का कारण महिला का पीरियड भी सही नहीं होता जिसके कारण बच्चा कंसीव करने से भी परेशानी होती है। नॉर्मल लेवल 1.0ng/ml पर होता है ज्यादा होने से भी परेशानी होती है अगर AMH ka level 3.0ng/ml होता है तो पॉलीसिस्टिक (polysistic) ओवेरियन सिस्ट (syst) होने का खतरा रहता है और अगर कम हुआ तो सही मात्रा में egg (follicle) नहीं बनने के कारण भी पीरियड्स नहीं आते जिससे कि बच्चा कंसीव करने में परेशानी होती है कभी-कभी किसी महिला का इतना कम होता है कि जिसकी वजह से उन्हें IVF जैसे प्रोसीजर करवाने पड़ते हैं और उसके बाद भी सफलता नहीं मिलती है यह शरीर में नेचुरल बनता है इसलिए इसे बढ़ाने का कोई बहुत बड़ा उपाय नहीं है और कभी-कभी उम्र के ऊपर भी निर्भर करता है ज्यादा उम्र के लोगो मे इसका लेवल कम होता है इसलिए 30 से 35 साल की उम्र के बीच में गर्भधारण करना उचित है। इसके बाद मुश्किल होता है इसे बढ़ाने का सिर्फ हमारे पास ही एक ऐसा साधन है जो हम दवाइयों से इसके egg की क्वालिटी को बढ़ा सकती हैं।

LOW AMH and High AMH ki Medicine

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