Habitual abortion बार बार गर्भपात होना एवं उपचार

मिसकैरेज एक ऐसा शब्द है जिसका मतलब एक औरत ही समझ सकती है जो इसे झेल चुकी हो कई बार कंसीव होने के बाद भी बार-बार गर्भपात हो जाता है यह एक ऐसी स्थिति है जिसके बारे में महिलाओं को ज्यादातर जानकारी ही नहीं होती कई बार वह अपने आप को ही कसूरवार समझने लगती हैं इसी के बारे में आज हम विस्तार पूर्वक आपको बताएंगे और इसका क्या उपचार है वह भी बताएंगे जिससे कि इस समस्या का स्थाई रूप से समाधान प्राप्त हो सके

मिसकैरेज के लक्षण सबसे पहले हम आपको इसके लक्षणों से अवगत कराते हैं

शुरुआती दौर में महिलाओं को इसका देर से पता चलता है क्योंकि उन्हें लगता है कि देर से महावारी आई है

शुरुआत में योनि से खून के थक्के निकलते हैं और बिल्डिंग की समस्या शुरू हो जाती है

प्रेगनेंसी की शुरुआत में यदि पेट के निचले हिस्से यानी गर्भाशय के आसपास ऐंठन और दर्द और हल्की सी ब्लीडिंग हो तो अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए

यदि स्तन में कठोरता हो तो भी गर्भपात के लक्षण हो सकते हैं

गर्भपात के कारण

ज्यादा उम्र भी बार-बार गर्भपात का एक कारण है

यदि मरीज पीसीओडी से पीड़ित हो और कंसीव हो जाए तो भी गर्भपात एक कारण हो सकता है

क्रोमोसोम्स असामान्यता

गुणसूत्र की संरचना अर्थात बनावट में किसी प्रकार की भी यदि असमान्यताएं हैऻ तो भी बार-बार गर्भपात होने की समस्या बनी रहती है

बैक्टीरियल इनफेक्शन

कुछ महिलाओं को प्रजनन अंगों में इंफेक्शन होने का खतरा बार-बार बना रहता है और इंफेक्शन हो भी जाता है उसकी वजह से भी गर्भपात होने की संभावना होती है

गर्भाशय की संरचना

कुछ महिलाओं को यूट्रस की बनावट अर्थात गर्भाशय की बनावट इस प्रकार होती है कि जिसमें फाइब्रॉयड या और भी कई प्रकार के समस्या हो सकती है उसमें भी बार-बार गर्भपात होता रहता है

कमजोर सरविक्स

इसका मतलब यह होता है की बच्चेदानी का मुंह किसी वजह से कमजोर होना जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता है उसी प्रकार से बच्चेदानी भी बड़ी होती चली जाती है परंतु बच्चेदानी का मुंह किसी वजह से कमजोर हो तो वह खुल जाता है और बच्चा बाहर आ सकता है इसके लिए अपने डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए क्योंकि इसका उपचार संभव है

कमजोर बच्चेदानी का होना

इसका कारण किसी को नहीं पता है परंतु कुछ महिलाओं की बच्चेदानी अर्थात यूट्रस कमजोर होती है जो आने वाले बच्ची को अच्छी तरह से पोषण देने में समर्थ नहीं हो पाती है इसकी वजह से भी कई बार गर्भपात हो जाता है इसका इलाज आयुर्वेद में संभव है यदि व्यक्ति 4 महीने का दवाइयों का कोर्स करके कंसीव करें तो इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है

तनाव

गर्भवती महिलाओं के लिए तनाव गर्भपात कार प्रमुख कारण है मस्तिष्क में से निक लने वाला एक हारमोंस इसके लिए जिम्मेदार होता है गर्भावस्था में महिलाओं को तनाव से दूर रहना चाहिए

मोटापा

मोटापे में भी महिलाओं को पहले तो गर्भधारण में ही समस्या हुई थी इसके बाद कई बार देखा गया है की गर्भपात की भी समस्या बनी रहती है इसके बाद यदि कैसी हैं डिलीवरी का समय हो जाए तो सी सेक्शन के द्वारा ही बच्चा होता है इसलिए कंसीव करने से पहले अपने वजन को सामान्य कर लेना ही उपयुक्त होता है

इसके अलावा खराब लाइफ़स्टाइल धूम्रपान मद्यपान एवं कैफीन का प्रयोग भी गर्भपात को निमंत्रण दे सकता है अतः गर्भधारण से पहले ही अपनी लाइफस्टाइल को सुधार लेना चाहिए और व्यायाम और योगा के द्वारा मन एकाग्र करके ध्यान करने से भी ब्लड की सप्लाई ब्रेन में अच्छी होने से तनाव पर काबू पाया जा सकता है इसके अतिरिक्त हमारे ऋषि यों के द्वारा दिया हुआ दिव्य ज्ञान अर्थात आयुर्वेद में वर्णित औषध का उपयोग करके इस समस्या का समाधान किया जा सकता है

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