अस्थमा क्या है , कैसे करें इलाज? जानिए डॉ राठी से

Dr. Narendra rathi

21वीं सदी में, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के कारण अस्थमा काफी तेज़ी से फैल रही है, जिसकी वजह से बहुत सारे लोगों को अपनी ज़िदगी से हाथ धोना पड़ता है। हिंदुस्तान टाइम्स में पब्लिज़ड रिपोर्ट के अनुसार हर साल भारत में 20 मिलियन लोग अस्थमा से पीड़ित हो जाते हैं।

अस्थमा का पूर्ण इलाज

क्या है अस्थमा? (What is Asthma?- in Hindi)

किसी व्यक्ति के Lung तक हवा तक न पहुंच पाने के कारण उसे सांस लेने में होने वाली तकलीफ को अस्थमा कहा जाता है।
अस्थमा की वजह से उसे कई समस्याएं जैसे सांस लेने, जोर-जोर से सांस लेना, खांसी होना, सांस का फूलना इत्यादि होती हैं।
अलग-अलग लोगों पर अस्थमा का असर अलग-अलग होता है, कुछ लोगों के लिए यह एक समस्या होती है,तो वहीं कुछ लोगों को इसकी वजह से काफी परेशानी झेलनी पड़ती हैं।

अस्थमा के लक्षण कौन-कौन से हैं? (Symptoms of Asthma-in Hindi)

आमतौर पर,अस्थमा के लक्षणों में सांस का फूलना, सीने में दर्द होना, खांसी होना इत्यादि शामिल हैं। इन सभी लक्षणों में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं और कुछ मामलों में अस्थमा से पीड़ित लोगों को यह पता ही नहीं चलता है कि उन्हें अस्थमा की बीमारी है क्योंकि उनमें ये लक्षण नज़र नहीं आते हैं।
अस्थमा की कई सारी संभावनाएं होती हैं, लेकिन अस्थमा के असर को नॉर्मल समझा जा सकता है और इसके लिए इलाज के सामान्य तरीकों से जैसे दवाईयां लेने को अपनाया जा सकता है।
अस्थमा के कुछ मामलें ऐसे देखने को मिलते हैं,जिनमें लोगों को कई सारी परेशानाओं जैसे दिल की धड़कनों का तेज़ी से चलना,इनहेलर का बार-बार इस्तेमाल करना, सांस लेने की समस्या का बढ़ना इत्यादी का सामना करना पड़ता है।
अस्थमा के कुछ मरीजों के लिए स्थितियां नेचुरल या Man-Made Conditions पर निर्भर करती है।  किसी व्यक्ति को अस्थमा का अट्रेक होने को अस्थमा ट्रिगर कहा जाता है।
जब ये सभी Substances इकट्ठा हो जाता है,तो इससे लोगों की Air-passages प्रभावित हो जाती है और वह बलगम से भर जाती है।
जिन चीजों से अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है, उनकी सूची नीचे दी गई है-

  1. कैमिकल और फ्रेग्नेंस- अगर, कोई व्यक्ति Strong कैमिकल और फ्रेग्रेंस के contact में आता है, तो उसे अस्थमा होने की संभावना बढ़ सकती है।
  2. पराग (Pollen)- अक्सर, अस्थमा pollen के कारण भी हो सकता है। इसी कारण सभी लोगों को पराग से दूरी बनाए रखनी चाहिए ताकि उन्हें किसी तरह की बीमारी न हो।
  3. तंबाकू का सेवन करना- दमा की बीमारी उस शख्स को भी हो सकती है, जो तंबाकू का सेवन करता है।
  4. मौसम का बदलना, मुख्य रूप से सर्दी में (ठंडी हवा का चलना)- कई बार, मौसम के बदलने से भी अस्थमा के होने की समस्या बढ़ सकती है। यह समस्या सर्दी के मौसम में भी बढ़ सकती है, इसी कारण लोगों को सर्दी के मौसम में अपनी Health पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  5. पालतू पशुओं के बाल- अगर आपको पालतू पशुओं (Pets) के साथ खेलना पसंद है, तो आपको सावधान रहना चाहिए क्योंकि यह आपको दमा का शिकार बना सकता है।

लोगों को डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? (When to visit doctor in Asthma)

अगर किसी व्यक्ति को डेली काम करते समय खांसी, सांस लेने में तकलीफ, इत्यादि परेशानी होती है तो उसे डॉक्टर से मिलना चाहिए। सबसे खराब स्थिति में अगर कोई व्यक्ति काफी समय से सांस लेने की तकलीफ के कारण इनहेलर का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

अत: ऐसी स्थिति में उसे तुरंत डॉक्टर मिलकर इसका इलाज शुरू कराना चाहिए।

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अस्थमा के आयुर्वेदिक उपचार

लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। 

अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।

दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है। 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है। 

180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है। 

अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है। मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है । 

दमा का अटैक में सावधानी 
सीधे बैठें और आराम से रहें
तुरंत सुनिश्चित मात्रा में रिलीवर दवा लें
पांच मिनट के लिए रुकें, फिर भी कोई सुधार न हो तो दोबारा उतनी दवा लें।

चिकित्सीय परामर्श जरूर ले

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