मिर्गी पर प्राकृतिक तरीके से पाएं काबू

Dr Narendra rathi

मिर्गी रोग दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी यानी विद्युत प्रवाह की गड़बड़ी के कारण होता है। यदि किसी व्यक्ति का मस्तिष्क ठीक ढंग से कार्य न कर पा रहा हो, तो व्यक्ति को मिर्गी का रोग हो सकता है। कई प्राकृतिक उपायों द्वारा इस पर काबू पाया जा सकता है।

मिर्गी न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर के कारण होता है। मिर्गी का रोग व्यक्ति के द्वारा अत्यधिक नशीले पदार्थों का सेवन करने, मस्तिष्क में गहरी चोट लगने या मानसिक सदमा लगने के कारण भी हो सकता है। ये बीमारी मस्तिष्क के विकार के कारण होती है। मिर्गी का दौरा पड़ने पर शरीर अकड़ जाता है, जिसे अंग्रेजी में सीजर डिसॉर्डर भी कहते हैं। 

मिर्गी के इलाज के लिए ये है कारगर उपाय

व्याप्त हैं भ्रांतियां 
डॉक्टर नरेंद्र राठी कहते हैं कि इस बीमारी को लेकर लोगों के मन में कई गलत धारणाएं हैं जिस कारण इसका सही तरह से इलाज नहीं हो पाता। लोग मिर्गी के मरीज को पागल ही समझ लेते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो लोग इस बीमारी को भूत-प्रेत का साया समझते हैं। सबसे जरूरी है इन भ्रांतियों को दूर करना।

मिर्गी के लक्षण
– बात करते हुए दिमाग ब्लैंक हो जाना, मांसपेशियों का अचानक फड़कना
– तेज रोशनी से आंखों में परेशानी होना, अचानक बेहोश हो जाना
– अचानक से मांसपेशियों पर नियंत्रण खो देना

दौरा पड़ने पर इन बातों का रखें ध्यान
– दौरा पड़ने पर रोगी को सुरक्षित जगह पर एक करवट लेटा दें
– कपड़े ढीले करें, खुली हवा में रखें और आसपास भीड़ न लगाएं

खानपान पर हो नियंत्रण 
रोगी की जीवनशैली में बदलाव करने से इस रोग पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। एक शोध के अनुसार, मिर्गी के रोगी को ज्यादा फैट वाला और कम कार्बोहाइड्रेड वाला खाना लेना चाहिए। इससे सीजर पड़ने के अंतराल में कमी आती है। शांत और आरामदेह वातावरण में रहते हुए नियंत्रित भोजन व्यवस्था अपनाना बहुत जरूरी है। भोजन भर पेट लेने से बचना चाहिए। थोड़ा-थोड़ा भोजन कई बार ले सकते हैं। रोगी को सप्ताह में एक दिन सिर्फ फलों का आहार करना चाहिए। थोड़ा व्यायाम करना भी जीवनशैली का भाग होना चाहिए।

बहुपयोगी है तुलसी 
तुलसी के पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से मिर्गी के रोगी को लाभ होता है। तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघाने से मिर्गी के रोगी को होश आ जाता है। रोजाना तुलसी के 20 पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है।

कुष्मांड और ब्राम्ही है कारगर उपाय

ग्लूटामेट (glutamate) और डोपामाइन (dopamine) के स्तर में हुए परिवर्तन के कारण मिर्गी का रोग होता है। इन न्यूरोट्रांसमीटरों को विनियमित करके, ब्राह्मी मिर्गी के कारण हुई सूजन को कम करने में मदद कर सकती है। ब्राह्मी की पत्तियां हज़ारों सालों से मिर्गी के इलाज के रूप में इस्तेमाल की जा रही है। यह मिरगी के दौरे को रोकती है, साथ ही मानसिक रोग के अन्य रूपों और नसों के दर्द सहित द्विध्रुवी विकारो (bipolar disorders) को रोकने में मदद करती है। यह कहा जाता है कि ब्राह्मी स्मृति की कमी में सुधार करने के साथ मिर्गी के इलाज में भी उपयोग की जा सकती है।

डॉक्टर से सलाह अवश्य लें

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