बांझपन – Infertility क्या होता हुए जानिए डॉ राठी से

डॉ नरेंद्र राठी

महिलाओं के जीवन में मां बनना सबसे बड़ा सुख माना जाता है लेकिन आजकल की आधुनिक जीवनशैली और अन्‍य कारणों की वजह से अब महिलाओं में बांझपन यानि इनफर्टिलिटी की समस्‍या बढ़ रही है। अगर आप भी बांझपन का शिकार हैं या इससे बचना चाहती हैं तो आइए जानते हैं इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में।

बांझपन वह स्थिति है जिसमें महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पाती हैं। अगर कोई महिला प्रयास करने के बाद भी 12 महीने से अधिक समय तक गर्भधारण नहीं कर पाती है तो इसका मतलब है कि वो महिला बांझपन का शिकार है। गौरतलब है कि गर्भधारण न हो पाने का कारण पुरुष बांझपन भी हो सकता है।

कुछ महिलाएं शादी के बाद कभी कंसीव नहीं कर पाती हैं तो कुछ स्त्रियों को एक शिशु को जन्‍म देने के बाद दूसरी बार गर्भधारण करने में मुश्किलें आती हैं। इस तरह बांझपन दो प्रकार का होता है।

पुरुषों में प्रजनन क्षमता उनके शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्‍या पर निर्भर करती है। अगर संभोग के दौरान इरेक्‍शन होने पर पुरुष के शुक्राणुओं की संख्‍या कम होती है या स्‍पर्म कमजोर होते हैं तो इस परिस्थिति में उसकी महिला पार्टनर गर्भधारण कर पाने में असफल रहती है।

विश्‍व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक भारत में बांझपन से ग्रस्‍त महिलाओं की संख्‍या 9% से 16.8% के बीच है। भारतीय राज्यों में बांझपन की स्थिति हर राज्य में भिन्न है जैसे उत्तर प्रदेश में 3.7 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में 5 प्रतिशत और कश्मीर में 15 प्रतिशत महिलाएं बांझपन से ग्रस्‍त हैं। 

बांझपन के जोखिम कारक

निम्नलिखित कारकों में बांझपन की संभावना बढ़ सकती है:

  • 40 साल की उम्र से अधिक
  • तंबाकू इस्तेमाल
  • शराब का उपयोग करें
  • वजन ज़्यादा होना
  • जा रहा है वजन कम
  • व्यायाम के मुद्दों

बांझपन से निवारण

हाँ, बांझपन को रोकना संभव है निम्न कार्य करके निवारण संभव हो सकता है:

  • अपने आप को यौन संचारित संक्रमण से रोकें
  • एक स्वस्थ आहार ले लो
  • एक स्वस्थ वजन और जीवन शैली बनाए रखें

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