AMH क्या होता है ? AMH लेवल यदि हाई होगा तो क्या होगा ?

Dr. Narendra rathi

एएमएच यानि एंटी-मुलेरियन हार्मोन (Anti Mullerian Hormone in Hindi) एक प्रकार का हॉर्मोन होता है जो अंडाशय के अंदर मौजूद फॉलिकल्स के ग्रनुलोसा सेल (Granulosa Cells) के द्वारा बनाया जाता है। इस एएमएच के स्तर से हमें ओवेरियन रिज़र्व के बारे पता चलता है की ओवरी के अंदर कितने फॉलिकल्स या अंडे बचे हुए है। एएमएच की मात्रा का पता लगाने के लिए एएमएच टेस्ट (AMH Test in Hindi) किया जाता है। एंटी-मुलेरियन हार्मोन के स्तर में कमी ओवेरियन रिज़र्व में कमी को दर्शाता है जिसका मतलब है की महिला के अंडाशय में कम अंडे मौजूद है। जिसे लौ एएमएच के नाम से जाना जाता है।

एएमएच टेस्ट क्या है? (AMH Test Kya Hai in Hindi?)

AMH क्या होता है ?

AMH Blood Test in Hindi – यह एक प्रकार का ब्लड टेस्ट है जिसे एएमएच के स्तर का पता लगाने के लिए किया जाता है यानि महिला के अंडाशय में कितने अंडे बचे हुए है।

एएमएच टेस्ट कैसे किया जाता है? (AMH Test Kaise Hota Hai?)

इस टेस्ट में रोगी का ब्लड सैंपल लिया जाता है और फिर उसे टेस्ट के लिए लैब में भेजते है। जहाँ ब्लड में एएमएच की मात्रा की जांच की जाती है।

एएमएच कितना होना चाहिए? (AMH Kitna Hona Chahiye in Hindi?)

एएमएच का सामान्य स्तर 2.20 – 6.80 ng/mL होता है। अगर इसकी मात्रा 1 ng/ml से कम हो, तो उसे लौ एएमएच (Low AMH) कहा जाता है। जिन महिलाओं में एएमएच का स्तर कम होता है उन्हें गर्भधारण करने में समस्या होती है क्योंकि गर्भधारण के लिए उनके पास पर्याप्त अंडे नहीं होते है। एक महिला में उम्र के साथ अंडों की संख्या कम होती जाती है।

उम्र के साथ महिलाओं में अंडे कम क्यों होते जाते हैं?

एक लड़की जन्म के साथ निर्धारित अंडों के साथ पैदा होती है। जब वह लड़की बड़ी होती है और उसके पीरियड्स आने शुरू हो जाते है, तो हर महीने एक अंडा पीरियड्स के रूप में शरीर से बहार निकलता है। इस तरह से उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या कम हो जाती है। इसलिए कहा जाता है की कम उम्र की महिलाओं में ज़्यादा उम्र की महिलाओं के मुताबिक गर्भधारण की संभावना अधिक होती है क्योंकि उनके अंडाशयों में ज़्यादा अंडे मौजूद होते हैं।

कम उम्र में एएमएच का स्तर कम किस कारण से हो सकता है?

उम्र बढ़ने के साथ एमएचाइच यानि महिला के अंडाशयों में अंडो की संख्या कम हो जाती है। लेकिन कम उम्र की महिलाओं में भी आजकल उम्र से पहले एएमएच के स्तर में गिरावट देखी जा रही है। इसके पीछे सबसे मुख्य कारण है आजकल की ख़राब जीवनशैली, खानपान और तनाव।

इसलिए महिलाओं को संतलित आहार लेने और तनाव से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

एएमएच का स्तर कम होने पर गर्भधारण कैसे किया जा सकता है?

नहीं हो रहा है और आई यू आई ट्रीटमेंट भी फ़ैल हो गया है, तो ऐसे में वह असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्निक के बारे में सोच सकती है। उपचार के तौर पर निम्न विकल्प मौजूद है –

आई वी एफ – जैसे की कुछ महिलाओं में कम उम्र में एएमएच का स्तर कम होता है यानि अंडे कम होते है, लेकिन वो अच्छी क्वालिटी के हो सकते है। आई वी एफ की प्रक्रिया में, उनके अंडे को शरीर से बहार निकालकर, उसे पुरुष के शुक्राणु के साथ, लैब के अंदर फर्टिलाइज़ किया जाता है। फर्टिलाइज़्ड होने के बाद भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर करते हैं।

डोनर एग के साथ आई वी एफ – जिन महिलाओं की उम्र ज़्यादा होती है और एएमएच का स्तर कम होता है। उनमे अंडो की क्वालिटी अच्छी नहीं होती है। ऐसे मामलों में डोनर के अंडों का प्रयोग किया जाता है। अंडे और शुक्राणु के फर्टिलाइजेशन के बाद भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर करते है।

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